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राग का पूर्ण रूप

राग का पूर्ण रूप

राग को गाने के कुछ अपने नियम व् कायदे होते है  

बहुत से विद्यार्थियों को यह पता ही नहीं होता कि राग को गाने कि शुरुआत कहा से करते है 

किन किन तथ्यों का प्रयोग कब और कैसे किया जाता है 

इसे कितने भागो में बाटा गया है 

राग गायन को चार भागो में बाटा गया है 

आलाप 

बंदिश

लयकारी 

तान 

सबसे पहले आलाप आते है ये छह प्रकार के होते है इनका प्रयोग राग के धीमे विस्तार के लिए किया जाता है 

फिर आता है बंदिश गान इसके चार प्रकार होते है यह एक निरंतर लय में गायी जाती है इसके शब्द राग के स्वरों में व् स्वर ताल में बंधे होते है

लयकारी में बंदिश व् आलापों को ताल का ध्यान रखते हुए थोड़ी तेज़ गति में गाते है 

तान यह राग का गतिपूर्ण विस्तार है यह मुख्यत तीन प्रकार कि होती है इसमें ताल काफी तेज़ गति में चलती है 

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